Thursday, September 5, 2019

30 दिन में कश्मीर की बदलती तस्वीर

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अनुच्छेद  -३७० व ३५ए ख़त्म होते ही राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा हुआ है। जहाँ कुछ राजनेता इसे एक देश एक संविधान बता रहे हैं वहीं ज्यादातर विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। जानकारो का भी मानना है कि अनुच्छेद ३७०व ३५ए खत्म होने से जम्मू-कश्मीर सही मायनो में अब भारत का अभिन्न अंग बन गया है। देश के अन्य राज्यों में भी लोगों ने बड़े पैमाने पर ढोल नगाड़ो पर नाच गाकर और एक दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी ख़ुशी का इजहार किया देश का प्रत्येक नागरिक यही चाहता था की जम्मू कश्मीर पूर्ण रूप से भारत का हिस्सा बने।  यहाँ मैं डॉ० श्यामा प्रसाद मुखर्जी के उस नारे का उल्लेख करना चाहूंगी जिसमें कहा गया था कि एक देश में दो विधान ,दो निशान,और दो प्रधान नहीं चल सकते। 

अब अनुच्छेद ३७० का खंड-१ लागू रहेगा शेष खंड समाप्त कर दिए गए हैं खंड -१ भी राष्ट्रपति द्वारा लागू किया गया था। राष्ट्रपति द्वारा इसे भी हटाया जा सकता है। अनुच्छेद के खंड -१ के मुताबिक जम्मू और कश्मीर की सरकार से सलाह कर राष्ट्रपति सविंधान के विभिन्न अनुच्छेदों को जम्मू कश्मीर पर लागू कर सकता है

जम्मू कश्मीर व लद्दाख़ के लोग भी अब शिक्षा के अधिकार ,सूचना के अधिकार जैसे भारत के हर कानून का लाभ उठा सकेंगे। केंद्र सरकार की कैग जैसी संस्था अब जम्मू कश्मीर में भी भिरष्टाचार  पर नियंत्रण के लिए ऑडिट कर सकेंगे। इससे वहाँ भिरष्टाचार पर लगाम लगेगी।

यहाँ मै कॉंग्रेस व कई अन्य पार्टियों के नेताओं की वहाँ जाकर माहौल खराब करने की कोशिश को भी सही नहीं मानती क्योकि किसी भी बड़े ओपरेशन के बाद हालत सामान्य होने में वक्त लगता है और कश्मीर तो ७० साल पुराना मसला है जबकि खुद भारत सरकार के राष्ट्रीय  सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल वहां जाकर लोगो से मिले और उन्हे आश्वासन दिया कि सब अच्छा होगा।

हम सभी जानते हैं कि ये फैसला कश्मीर की जनता के विकास को ध्यान में रखकर ही  लिया गया हैऔर उम्मीद करते हैं कि प्रधानमंत्री के इस कार्यकाल में ही जम्मू कश्मीर इतनी तरक्की करेगा कि खुद कश्मीर की जनता संचार माध्यमों पर अपनी ख़ुशी का इजहार करते हुए दिखेगी। जम्मू कश्मीर के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के टवीट को पढ़कर राज्य सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने कहा ,वरिष्ठ नेताओ को सामान्य हालात में लौटने की कोशिश कर रहे राज्य की स्तिथि को बिगाड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए। राजनीतिक नेताओं से अनुरोध किया जाता है कि वे सहयोग करें और श्रीनगर का दौरा न करें। 

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद ३७० हटने के लगभग ३० दिन बाद धीरे -धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं। ८०%पाबन्दियाँ हटा दी गयी हैं । स्कूल कॉलेज खोले जा चुके हैं और सड़को पर भी आवाजाही शुरू हो गयी है। लैंडलाइन सुविधायें भी सामान्य हो गयी हैं कुछ दिनों में मोबाइल सेवा भी शुरू कर दी जाएगी ।   प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में तमाम पाबंदियों को हटा लिया जायेगा। 

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद ३७० हटाने के बाद मोदी सरकार ने वहाँ के लिए  एक बड़े पैकेज का ऐलान  किया है। १५००० करोड़ के पैकेज के अलावा राज्य में राजनैतिक प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाये गए हैं। राज्य में कश्मीरी युवाओं के लिए ५०००० नौकरियों के ऐलान  के साथ साथ सेना और पुलिस में भी भर्ती के अवसरों को खोला गया है। केंद्र सरकार ने १२ से १४ अक्टूबर के बीच श्रीनगर इन्वेस्टर समिट करने का ऐलान  किया है जिसमे ७५००० करोड़ के निवेश के प्रस्ताव आने का दावा किया जा रहा है। 

गौरतलब है कि नई व्यवस्था के बाद ३१ अक्टूबर को जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो नए केंद्रशासित प्रदेश बन जायेंगे। राज्य में ३१ अक्टूबर  २०१९ से १०६ केंद्रीय कानून पूरी तरह लागु हो जायेंगे लेकिन ३० अक्टूबर तक केंद्र और राज्य के कानून लागु रहेंगे। सरकार वहां ५ अगस्त से लेकर अब तक के हालात से संतुष्ट है और सरकार के लिए सबसे बड़ी राहत की बात है कि अब तक कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई। गृहमंत्री अमित शाह ने ३ सितम्बर मंगलवार को जम्मू कश्मीर से पहुंचे पंच- सरपंचो के प्रतिनिधि मंडल को यह आश्वासन दिया की जम्मू कश्मीर के हर गांव में कम से कम ५ लोगों को सरकारी नौकरी दी जाएगी। गृहमंत्री ने उन्हे पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने के साथ ही सभी पंचो सरपंचो को २ लाख रुपए का बीमा कवर देने का ऐलान  किया है। मंगलवार को जब कश्मीर में नौजवानो की पुलिस भर्ती अभियान शुरू हुआ तो  भारतमाता की जय के नारे लगे और कश्मीर के शांतिप्रिय  लोगों की असल तस्वीर सामने आई। कश्मीर और कश्मीरियत को गले लगाने में कोई सबसे बड़ा रोड़ा था तो सिर्फ और सिर्फ ३७० ही था ।  

        

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